नीचे इस मंत्र के अर्थ, महत्व और इसकी पूरी स्तुति के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है।
विवेक पुस्तक लेकर जंगल के रास्ते जा रहा था। रास्ते में उसने एक गरीब महिला को देखा। वह एक बच्चे को जन्म देने वाली थी और बहुत पीड़ा में थी। कोई डॉक्टर नहीं था। विवेक जब वहाँ पहुँचा, तो उसने देखा कि एक अन्य ग्रामीण महिला उसकी सहायता कर रही थी। उस महिला के चेहरे पर पसीना था, लेकिन उसकी आँखों में एक अनोखा करुणा और शक्ति थी। तभी विवेक को वह श्लोक याद आया: "या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।" (जो सभी प्राणियों में माता के रूप में स्थित हैं।)
उसने समझ लिया। देवी केवल हाथ में त्रिशूल लेकर नहीं खड़ी हैं, बल्कि वे हमारी बुद्धि, हमारी सोचने की क्षमता के रूप में भी हैं। उसने मन ही मन उस गुरु को प्रणाम किया। ya devi sarva bhuteshu in hindi pdf
हे देवी! जो सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में स्थित हैं, उन्हें मेरा बार-बार प्रणाम है।
यह कहानी PDF में बच्चों और बड़ों दोनों के लिए प्रेरणादायक होगी। नीचे इस मंत्र के अर्थ
या देवी सर्वभूतेषु वृत्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ बल्कि वे हमारी बुद्धि
इसका हिंदी अर्थ है: मंत्र के मुख्य रूप
घर लौटते समय विवेक का अहंकार (Ego) टूट चुका था। उसने सीख लिया था कि देवी किसी एक स्थान पर कैद नहीं हैं। वे सर्वभूतेषु (सभी प्राणियों में) हैं। वह खुशी-खुशी अपनी पुस्तक (PDF) को अपने सीने से लगाकर ले गया, क्योंकि अब उसे हर इंसान, हर जानवर और हर प्रकृति में देवी दिखाई दे रही थीं।